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Yoga

बाबा रामदेव के योगासन और उनके फायदे

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बाबा रामदेव के योगासन – बाबा रामदेव को हमारे भारत देश के अलावा पूरे विश्व भर में अपने योग में क्रांतिकारी बदलाव के लिए एक प्रसिद्ध योगी के रूप में जाना जाता हैं। उनके द्वारा बताये गए तरीको से योग करने से व्यक्ति के शरीर में उत्पन्न विभिन्न बीमारियों को नियंत्रित कर अच्छे स्वास्थ्य को प्राप्त करने तथा शांति और आनंद प्राप्त करने में सहायता मिलती हैं। उन्होंने अपने योग में बहुत सारे आसान व उन्हें करने के तरीको के बारे में बताया है जिन्हे कोई भी आसानी से घर बैठे कर सकता हैं। इसके प्रतिदिन अभ्यास करने से शांति, संवेदनशीलता, जागरूकता और अंतर्ज्ञान में बढोत्तरी होती है।

बाबा के योगासन

स्वामी रामदेव के अनुसार योग हर तरह की बीमारी कोसों दूर कर हमारे व्यक्तित्व का संतुलन बनाये रखता हैं। इसके साथ ही योग शरीर को हेल्दी रखने के साथ-साथ, शरीर को चुस्त तथा जोड़ों में जमा टॉक्सिन को बाहर निकालने में भी मदद करता हैं। योग सिर्फ एक शारीरिक अभ्यास नहीं बल्कि एक पूर्ण विज्ञान है जो शरीर, मन, आत्मा और ब्रह्मांड को एकजुट बनाये रखता है।


यदि आप भी योगाभ्यास की शुरुवात करना चाहते है या शुरुवात करने जा रहे हैं तो आज हम आपको इस लेख के जरिये बाबा रामदेव के योग व बाबा रामदेव का योगासन से होने वाले फायदे, उनको करने की विधि, समय व तरीके बताएंगे जिसकी सहायता से आप बिना किसी परेशानी से अपने घर पर ही योगासन कर सकते हैं।

बाबा रामदेव के कुछ मुख्य योगासन

अधोमुखश्वानासन योग की विधि

योगासनो में यह सबसे आसान योगासन है, जिसे सभी उम्र के लोग आसानी से कर सकते है। सबसे पहले स्वच्छ कम्बल, कपडे या योगामेट पर दोनों पैरों के बीच थोडा दूरी बनाते हुए सीधे खड़े हों जाए और उसके बाद धीरे से अपने शरीर को मोड़ते हुए V की आकृति बनाये। अब अपने पैरों और हांथों को बिना मोड़ें, अपने पैरों की उँगलियों की मदद से अपने कमर को पीछे की ओर खींचें और एक लम्बी साँस लें। इसी अवस्था में कुछ देर के लिए रुकें।

अधोमुखश्वानासन योग के फायदे –

 मांसपेशियां मजबूत बनती है तथा रक्त परिसंचरण में सुधार आता है।
 शरीर मेंअच्छा खिचाव आता है तथा साइनस की समस्या दूर होती है।

ताड़ासन योग की विधि:-

किसी स्वच्छ कम्बल, कपडे या योगामेट पर अपने दोनों पैरों के बीच थोडी सी जगह बनाते हुए पैरों के मदद से सीधे खड़े हो जाए। अब धीरे-धीरे अपने दोनों हांथों को सिर के ऊपर उठाएं और अपनी उंगलियों को आपस में बांध लें और गहरी सांस लें। इसके पश्चात अपनी एड़ी उठाते हुए शरीर को थोडा ऊपर उठायें और अपने पैर की उंगलियों पर खड़े हो जाएं। इस स्थिति में लगभग 10 सेकेंड तक खड़े रहे और फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी सामान्य अवस्था में आ जाएं।

ताड़ासन योग के फायदे-

 लंबाई बढ़ाने में मददगार है तथा पीठ के दर्द में बहुत लाभकारी है।
 मुद्रा में सुधार होता है तथा मानसिक जागरूकता बढ़ती है
 घुटनों के दर्द से राहत मिलती है तथा संतुलन बनाये रखने में फायदेमंद साबित होता हैं।

सुखासन योग की विधि

सबसे पहले फर्श पर एक स्वच्छ दरी बिछाएं और अपने पैरों को शरीर के सामने फैला कर बैठ जाएं। अब दाएं पैर को मोड़कर पंजे को बाई जांघ के नीचे तथा बाएं पैर को मोड़कर पंजे को दाहिनी जांघ के नीचे रखें। उसके बाद दोनों हांथों की हथेलियों को ऊपर करके अपने घुटनों पर रखते हुए ज्ञान मुद्रा धारण करें और धीरे-धीरे लम्बी साँस खीचें और छोड़े। इस मुद्रा में लगभग दस मिनट तक रहे।

सुखासन योग के फायदे-

 यह चिंता, तनाव, कष्ट ,पीड़ा और थकान से जुड़े रोग दूर कर शारीरिक और मानसिक संतुलन प्रदान करता है।
 रीड की हड्डी में खिचाव तथा छाती का चौड़ाई बढाने में बहुत लाभकारी है।

शवासन योग की विधि

इस योग में सीधा कमर के बल लेट जायें और हाथों की अंगुलियां तथा हथेली को ऊपर की दिशा में रखते हुए धड़ से 45 डिग्री का कोण बनाये तथा इसके साथ ही पैरों के बीच एक या दो फुट की दूरी का फासला रखें। अब अपनी आँखे बंद कर धीरे धीरे सांस लें और छोड़े। इस आसन को 5 से 10 मिनिट तक करे।

शवासन योग के फायदे-

 यह आसन तनाव घटाने में, थकावट दूर करने में, उच्च रक्तचाप कम करने में तथा हृदय रोग में लाभदायक है।
 इससे चिंता, बेचैनी दूर कर ध्यान / एकाग्रता में सुधार लाता है और शरीर को आराम मिलता है।

वीरभद्रासन योग की विधि

सबसे पहले सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बीच 3.5 से 4 फीट का गैप बना लें। अब अपने बायें पैर को 45 से 60 डिग्री अंदर की ओर तथा दाहिने पैर को 90 डिग्री बाहर की ओर तब तक मोड़ें जब तक घुटना सीधा टखने की ऊपर ना आ जाए। इसके पश्चात लम्बी साँस लें और दोनों हांथों को जमीन के समान्तर, धड़ की सीध में ऊपर उठायें और अपने सर को दाएँ तरफ मोड़ें और इसी पोजीशन में कुछ समय के लिए रुकें। ऐसा अलग अलग स्टेप लेकर लगभग 5-6 बार करें।

वीरभद्रासन योग के फायदे-

 इस योग मुद्रा से छाती और फेफड़ों, पैरों और भुजाओं, कंधे और गर्दन को मजबूती मिलती है।
 जांघों, पिंडलियो और टखनों को शक्ति मिलती है।
 साइटिका से राहत प्राप्त होती है।

कपालभाती प्राणायाम की विधि

सबसे पहले किसी स्वच्छ व आरामदायक आसन पर बैठ जाएं और अपने सिर और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए हाथों को घुटनों के उपर ले जाकर ज्ञान मुद्रा में रखे। अब एक गहरी सांस लें और पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ते हुए धीरे-धीरे सांस छोड़ें। सांस लेने और छोड़ने की इस प्रकिया को प्रारंभ में आठ से दस बार तक करे और इस पूरे चक्र को तीन से पांच बार दोहराएं।

कपालभाती प्राणायाम के फायदे-

 यह वज़न कम कर, मेटबॉलिज़म को बेहतर करने में मदद करता हैं।
 डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए बहुत ही लाभदायक हैं।
 पेट की मासपेशियों को मज़बूत करता है तथा शरीर में रक्त के परिसंचरण को सही करता हैं।
 यौन संबंधी कई विकारों तथा पाचन अंगों को उत्तेजित करता हैं।

भस्त्रिका प्राणायाम की विधि

इस आसन को करने के लिए किसी भी शांत वातावरण में सिद्धासन, वज्रासन, पद्मासन या सुखासन जैसे किसी भी सुविधाजनक आसन में बैठ जाएँ। अब गर्दन, कमर, पीठ और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए हाथों को चिन या ज्ञान मुद्रा में रखें। अब नाक से इस प्रकार सांस ले कि उसकी आवाज साफ-साफ सुनाई दे। कुछ सेकंड के लिए सांस रोक कर रखें फिर इसी तरह आवाज करते हुए सांस को बाहर छोड़ें। इस तरीके से भास्त्रिका प्राणायाम का पूरा चक्र होता है। इस प्रक्रिया को प्रारंभ में 5 बार दोहराएँ।

भस्त्रिका प्राणायाम के फायदे-

 इस प्राणायाम को करने से शरीर के विषाक्त पदार्थ खत्म होते है तथा फेफड़ों में हवा के तेजी से अंदर-बाहर होने की वजह से रक्त से कार्बन डाई ऑक्साइड बाहर निकलती है और खून साफ होता है।
 यह प्राणायाम नियमित करने से फेफड़े मजबूत होते है तथा टीवी, दमा और सांसों के रोग दूर हो जाते हैं।
 यह तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है और तीनों दोष (कफ, पित्त और वात) को संतुलित रखता हैं।
 इससे लीवर और किडनी की मसाज होती है।

भ्रामरी प्राणायाम की विधि

इस आसान को शांत वातावरण में सूर्योदय या सूर्यास्त के समय करना अच्छा होता है। इस आसन को करने के लिए ध्यान करने के किसी भी सुविधाजनक आसन जैसे पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएं। अब अपने दोनों हाथों को मोड़कर अपने कानो के पास लाएं तथा कानों को अंगूठे की सहायता से बंद करें और बाकी उंगलियों में से तर्जनी उंगली को माथे पर और अनामिका, मध्यमा और कनिष्का उंगली को आंखों के ऊपर रखें। इस दौरान मुंह बंद रहे तथा नाक से एक लंबी गहरी श्वास अंदर ले और उसके बाद नाक से मधुमक्खी की तरह गुनगुनाते हुए सांस बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को लगभग 3 से 4 बार दोहराएँ।

भ्रामरी प्राणायाम के फायदे-

 सिर दर्द से राहत पाने में, चिंता और क्रोध से मुक्त करता है।
 सर्दी के मौसम में नाक से पानी गिरना, नाक बंद होना, सिर में दर्द होना, आधे सिर में बहुत तेज दर्द होना आदि
से फायदा मिलता है।
 हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति के लिए लाभकारी है।
 इस प्राणायाम को निरंतर करने से बुद्धि का विकास होता है तथा आत्मविश्वास बढ़ता है।

अनुलोम विलोम प्राणायाम की विधि

इस प्राणायाम को करना बहुत आसान है। सबसे पहले किसी भी आरामदायक स्थान पर पद्मासन की अवस्था में बैठ जाए उसके बाद अपने दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिने नथुने को बंद करें तथा बाएं नथुने से धीरे-धीरे श्वास लें। अब अपने दाहिने नथुने को छोड़ते हुए अपनी मध्यमा उंगली की सहायता से बाएं नथुने को बंद करे और दाहिने नथुने से श्वास बहार की ओर छोड़े। यही प्रक्रिया बाएं नथुने के साथ भी करे, ऐसा करने से अनुलोम-विलोम प्राणायाम का एक क्रम पूरा हो जाएगा। यह प्राणायाम दिन के किसी भी समय किया जा सकता हैं।

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे-

 यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालता है तथा ‘वात दोष’ की गड़बड़ी के कारण होने वाली सभी बीमारियों कोठीक करता है।
 पेट फूलना, मांसपेशियों के रोग और अम्लता में फायदेमंद हैं, इसके साथ ही अवसाद, तनाव और दिल सेसंबंधित समस्याओं के लिए चिकित्सकीय है।

 यह रक्त परिसंचरण में सुधार लाता है तथा गैस्ट्रिक, कब्ज और खर्राटों का इलाज करता है।
 क्रोध, तनाव, विस्मृति, चिंता, बेचैनी, उच्च रक्तचाप, माइग्रेन और नींद की कमी को दूर करता है।

ऊपर दिए हुई जानकारी में हमने आपको बाबा रामदेव के योग व बाबा रामदेव के योगासन के बारे में बताया है हमे आशा है कि आप इन आसनों को आसानी से अपने घर पर कर पाएंगे परन्तु यदि आपको लगता है कि आपको इन आसनो का सही ज्ञान नहीं है तो इन्हें योग शिक्षक की देखरेख में ही करे अथवा किसी भी चिकित्सकीय स्थिति में अपने डॉक्टर से सलाह जरुर करे।

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